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हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने की पूरी गाइड | Health insurance buying guide full detail


हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने की पूरी गाइड 


आज की दौड़ में जब इलाज के खर्च तेजी से आसमान चुरा है तो हेल्थ इंश्योरेंस लेना एक ही मात्र विकल्प बचता है जो कि आपको सुरक्षा कवच देता है 

Health insurance buying guide full detail
Health insurance buying guide full detail 



पहले लोग सोचती थी कि हमें कुछ नहीं होगा लेकिन सच्चाई यह है कि एक छोटी सी बीमारी भी लाखों का खर्च खड़ा कर सकती है ऐसे में अगर आपके पास सही हेल्थ इंश्योरेंस है तो आप न केवल अपने पैसों को बचाते हैं बल्कि बिना तनाव की बेहतर इलाज भी करवा सकते हैं यही वजह है कि आज हर समझदार व्यक्ति अपनी कमाई का एक हिस्सा हेल्थ इंश्योरेंस में निवेश करता है। 

आज की पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि हेल्थ इंश्योरेंस क्या है और हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए 

हेल्थ इंश्योरेंस क्या है ? what is health insurance 


सरल शब्दों में समझी तो हेल्थ इंश्योरेंस एक ऐसा समझौता है जिसमें आप हर साल एक निश्चित राशि यानी एक प्रीमियम भरते हैं यह आपका हर महीने भी हो सकता है बदले में इंश्योरेंस कंपनी आपको मेडिकल खर्च को कर करती है इसमें हॉस्पिटल में भर्ती होना ऑपरेशन दवाइयां टेस्ट और कई मामलों में ओपीडी खर्च भी शामिल होता है कुछ एडवांस पॉलिसी में घर पर इलाज और डे केयर जैसे प्रक्रियाएं भी कर की जाती है। 

हेल्थ इंश्योरेंस आपको अचानक आने वाले खर्चे से बचाता है और सेविंग को भी सुरक्षित रखता है ।

हेल्थ इंश्योरेंस कितने प्रकार के हो सकते हैं?  


इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान - 


यह प्लान एक व्यक्ति के लिए होता है जिसमें पूरा सम इंश्योरेंस सिर्फ उसी व्यक्ति के लिए होता है अगर आप अकेले हैं या आपकी हेल्थ रिस्क ज्यादा है तो आप यह प्लान आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि पूरा कर इसमें सिर्फ आपको ही मिलता है। 

इस प्लान में केवल एक ही व्यक्ति को फायदा मिलता है जिसके नाम पर हेल्थ इंश्योरेंस होता है इसमें आपका कोई भी अन्य फैमिली मेंबर शामिल नहीं हो सकता ना ही बीमार पड़ने पर उसकी कोई भी कर दिया जाता है यह सिर्फ एक व्यक्ति के लिए होता है और इसलिए इसको इंडिविजुअल हेल्पलाइन भी कहा जाता है। 

Family health insurance plan 


इस इस हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में आपका पूरे परिवार का कवर मिलता है इसमें आपको एक तेरा राशि देनी होती है प्रीमियम के रूप में जिससे आपका पूरा परिवार सुरक्षित रहता है यानी कि आपके परिवार का कोई भी व्यक्ति कभी बीमार पड़ता है और वह अस्पताल में भर्ती होता है तो आपको पूरा कर दिया जाता है इस तरह के प्लान में प्रीमियम भी थोड़ा ज्यादा रहता है और सुरक्षा भी आपके पूरे परिवार की मिलती हैं ।

सीनियर सिटीजन प्लान- 


अब बात करते हैं सीनियर सिटीजन प्लान की जो की अलग से आते हैं यह 60 वर्षों से अधिक उम्र वाले लोगों के लिए डिजाइन किया गया है इसमें उम्र से जुड़ी हुई बीमारियां को ध्यान में रखते हुए इस प्लान को बनाया जाता है इसका प्रीमियम भी थोड़ा ज्यादा हो सकता है क्योंकि इसमें कोई गंभीर बीमारियां भी आ सकती है यदि आपको किसी ऐसी व्यक्ति के लिए इंश्योरेंस लेना है जिनकी उम्र 60 वर्ष से ऊपर है तो उनके लिए आप इस तरह का प्लान ले सकते हैं। 

टॉप अप और सुपर टॉप अप प्लान - top up and super top up plans 


अगर आपके पास पहले से कोई बेस पॉलिसी है तो आप टॉप अप या सुपर टॉप अप प्लान लेकर अपना कर बढ़ा सकते हैं यह कम प्रीमियम में ज्यादा सुरक्षित पानी वाला एक स्मार्ट तरीका माना जाता है।

कितना कवर इंश्योरेंस लेना चाहिए ? 


यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है और अक्सर लोग यही गलती कर देते हैं आज के समय में एक बड़ी बीमारी का इलाज 5 से 10 लख रुपए तक आसानी से पहुंच जाता है खासकर बड़े शहरों में अगर परिवार में ज्यादा सदस्य है या आप प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करवाना चाहते हैं तो 15 से 20 लाख का कर लेना ज्यादा सुरक्षितरहेगा। 

अगर आपका बजट सीमित है तो आप बसे पॉलिसी के साथ सुपर टॉप अप प्लान जोड़कर कम लागत में ज्यादा कर पा सकते हैं याद रखें कम कर लेना भविष्य में भारी भी पड़ सकता है। 

जरूरी टर्म जो हर पॉलिसी में होते हैं ? 


अब बात करते हैं कि जो पॉलिसी में जरूरी जरूरी शर्तें होती है उनका आपको पहले ही पता होना चाहिए उनको आपको पहले ही पढ़ना चाहिए उसके बाद ही पॉलिसी लेनी होती है यह सब चीज आपको हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले अच्छे से देखनी होती है

Waiting period 


यह बहुत समय होता है जिसमें आप कुछ बीमारियों के लिए क्लेम नहीं कर सकते आमतौर पर यह दो से चार साल का होता है इसलिए जितनी जल्दी पॉलिसी लेंगे उतनी जल्दी अवधि पूरी होगी यानी कि जब भी आप इंश्योरेंस लेते हैं तो आपको उसे पॉलिसी का वेटिंग पीरियड जरूर देखना चाहिए इससे आपको ही फायदा होगा क्या पता आपको कोई बीमारी हो जाए आप बीमार पड़ जाए और वह उसे पॉलिसी के अंदर नहीं आता हो और उसमें वेटिंग पीरियड ज्यादा हो तो आपको ही परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 

इसलिए जब भी आप कोई भी पॉलिसी लेते हैं तो उसमें आप वेटिंग पीरियड सबसे पहले जांच ले की कितना वेटिंग पीरियड है उसके बाद ही उसे पॉलिसी को ले। 

फ्री एक्जिस्टिंग डिजीज - 


अब बात करते हैं परी एक्जिस्टिंग डिजीज कि अगर आपको कोई भी बीमारी पहले से है जैसे डायबिटीज ब्लड प्रेशर तो उसे कर होने से समय लगता है यह भी वेटिंग पीरियड के बाद ही कर होता है। 

को पेमेंट - co payment 


इसका मतलब है कि क्लीन किस में आपको कुछ प्रतिशत खर्च खुद देना होता है बेहतर है कि ऐसी पॉलिसी चुन्नी जिसमें को पेमेंट कम हो या कम से कम हो इस चीज का ध्यान भी आपको अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले रखना चाहिए ।

कैशलैस ट्रीटमेंट - cashless transaction 


अब बात करते हैं कैशलैस ट्रीटमेंट की इस सुविधा के तहत आपके नेटवर्क हॉस्पिटल में बिना पैसे दिए इलाज करवाने की सुविधा मिलती है बल सीधे इंश्योरेंस कंपनी चूकती है तो आपको इस तरह की ही पॉलिसी लेनी चाहिए जिसमें की आपको कैशलेस सुविधा मिले ताकि आपको पैसों का कोई झंझट ही नहीं रहे इसमें सीधे ही हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी आपका बिल चूकती है लेकिन कि उन्हें अस्पताल में होता है जो कि आपकी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के साथ जिन हॉस्पिटल का टाइअप होता है ।

नेटवर्क हॉस्पिटल का महत्व - importance of hospital network 


जब आप हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने हैं तो यह जरूर देखें कि आपके शहर में उसे इंश्योरेंस कंपनी के नेटवर्क वाली हॉस्पिटल है कि नहीं नेटवर्क हॉस्पिटल होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको कैशलेस इलाज मिलता है जिससे आपको तुरंत पैसे देने की जरूरत नहीं पड़ती है अगर नेटवर्क हॉस्पिटल नहीं होगा तो आपको पहले खुद से पैसे देने पड़ेंगे और बाद में क्लेम करना पड़ेगा जो थोड़ा जटिल रहता है इसलिए आप ऐसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली जिसमें की उसे सिटी में उसे शहर में उसे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का हॉस्पिटल हो जिनके साथ उनका नेटवर्क हो। 

क्लीन सेटेलमेंट रेशों क्यों जरूरी होता है ? 


जब भी आप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं तो आपको इस चीज का भी ध्यान रखना चाहिए कि क्लेम सेटेलमेंट रेशों आपके इंश्योरेंस कंपनी का अच्छा होना चाहिए इससे आपको आगे जाकर दिक्कत नहीं आएगी और आपकी जो टीम है वह जल्द से जल्द हो जाएंगे। 

क्लीन सेटेलमेंट रेशों यह बताता है कि इंश्योरेंस कंपनी कितने प्रतिशत क्लीन को मंजूरी देती है उदाहरण के लिए अगर किसी कंपनी का रेशियो 95% है तो इसका मतलब है कि 100 में से 95 क्लेम पास हो जाते हैं इसलिए हमेशा ऐसी कंपनी चाहिए जिसका क्लेम सेटेलमेंट रेशों ज्यादा हो और जिसकी मार्केट में एक अच्छी खासी इमेज हो। 

पॉलिसी खरीदते समय ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातें ? 


हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय जल्दबाजी करना सबसे बड़ी गलती है आपको अलग-अलग कंपनियों के प्लान को अच्छे से समझना चाहिए और फायदे और शर्तों की तुलना करनी चाहिए सिर्फ सस्ता प्रीमियम देखकर पॉलिसी लेना सही नहीं है क्योंकि कई बार सस्ते प्लान में जरूरी खबर शामिल नहीं होते हैं हमेशा यह देखिए की पॉलिसी में क्या-क्या शामिल है और क्या नहीं है बहुत बार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां प्लान को बेचने के लिए आपसे कुछ शब्द छुपाती है जो आपको बाद में पता चलती है जिसका आपको बाद में कामयाब घटना पड़ता है इसलिए जब भी आप कोई भी प्लान ले तो पहले हर चीज को पढ़ ले उसके बाद ही प्लान ली इसके अलावा अपनी उम्र परिवार की जरूरत और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते ही एक सही प्प्लान का चुनाव अपने लिए करें ।

हेल्थ इंश्योरेंस लेने का सही समय ? 


हेल्थ इंश्योरेंस लेने का सबसे अच्छा समय आज है जितनी जल्दी आप कोई हेल्प इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं उतना कम प्रीमियम आपको देना पड़ता है आपको ज्यादा समय इसमें नहीं लेना चाहिए आप जितनी जल्दी हो सके अपने और अपने परिवार के लिए एक हेल्थ इंश्योरेंस ले सकते हैं आप इतना जल्दी शुरू करते हैं आपको इतने अच्छे फायदे मिलते हैं। 

कम उम्र में पॉलिसी लेने से वेटिंग पीरियड जल्दी खत्म हो जाता है और भविष्य में क्लेम करना आसान हो जाता है बट उम्र के साथ प्रीमियम बढ़ता है और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है इसलिए आपको जल्द से जल्द अपने लिए एक अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस लेनी चाहिए। 

निष्कर्ष  


हेल्थ इंश्योरेंस एक ऐसा निवेश है जो आपको मुश्किल समय में आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से सुरक्षित बनता है यह आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित करता है और आपके बिना चिंता की बेहतर इलाज करने की सुविधा देता है अगर आप समझदारी से पूरी जानकारी के साथ और अपनी जरूरत के अनुसार सही पॉलिसी चुनते हैं तो अपने और अपने परिवार के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बना लेते हैं। 




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