लेकिन अब शिमला वासी को पानी की कमी महसूस नहीं होगी क्योंकि अब शिमला में सतलुज का पानी लाया जाएगा जिसका की आखिरी ऑपरेशनल पूरा हो चुका है और 11 मार्च को इसकी पहली सप्लाई संजौली की टैंको में भरी जाएगी ।
सतलुज से आने वाली और सप्लाई की फाइनल टेस्टिंग 8 मार्च 2026 को पहले ही पूरी की गई थी 3 महीने की टेस्टिंग के बाद अभी और ट्रायल रन पर चल रहा है और अप्रैल तो 26 से यह पूरी तरह से चालू हो जाएगा यानी कि आने वाले समय में शिमला में पानी की समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा।
इस वाटर प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल
इस वाटर प्रोजेक्ट का नाम सतलुज रिवर बुक वाटर सप्लाई स्कीम है जो सुकरौली से लिया जाएगा जो की सुनी के पास है ।
इस वाटर प्रोजेक्ट की कास्ट लगभग 500 करोड़ है और हिमाचल का यह सबसे बड़ा वाटर प्रोजेक्ट है जो की वर्ल्ड बैंक की सहायता से बनाया जा रहा है और स्मार्ट सिटी के अंदर शिमला में इसकी सप्लाई दी जाएगी।
वैसे तो यह प्रोजेक्ट सतलुज नदी से पानी लगा और उसको फिल्टर करके फिर शिमला के लिए सप्लाई किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट के तहत 3 स्टेज में इस पानी को लिफ्ट किया जाएगा और 27 किलोमीटर से ज्यादा लंबी पाइपलाइन से शहर तक पहुंचाया जाएगा रास्ते में 700 प्लस पेट बचाएगी है पहले 1330 काटने वाले थे लेकिन कुछ इनोवेशन तरीके से काम किया गया और इन सभी पेड़ों को बचाया गया।
इस वाटर प्रोजेक्ट की क्षमता 107 एमएलडी मिलियन लीटर प्रति दिन है शुरू में एक्स्ट्रा 42 एमएलडी मिलेगा 15 साल बाद 67 एमएलडी तक बढ़ेगा।
शिमला का पानी पहले ही पुरानी स्कीम ऑन से आता था जो की घुमा गिरी चुरहट क्या अश्वनी खड़ से 40 से 42 एम मिलता है अप्रैल से 80 से 82 एमएलडी हो जाएगा यानी लगभग 2 गुना पानी अब शिमला में आएगा।
स्क्रीम को पूरी तरह लागू होने के बाद शिमला में 24 7 पानी की सप्लाई रहेगी फेस टू में यह 24 घंटे पानी देने का प्लान है सोलर एनर्जी का भी इसमें उसे किया जाएगा।
यू प्रोजेक्ट से पानी नहीं ला रहा बल्कि शिमला की पुरानी स्कीमों की कमी को भी पूरा कर रहा है खासकर अश्विनी खंड बंद होने के बाद वहां से पानी कम आने लगा था अब वहां की पानी को कमी को पूरा करने के लिए स्कीम का लाभ शिमला वासियों को मिलेगा।
मैं खुद शिमला में रहता हूं और पानी की कमी को महसूस करता हूं उम्मीद करता हूं कि आने वाले समय में शिमला में पानी की कमी नहीं होगी और शिमला में 24 ऑवर पानी रहेगा।

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